Intermittent Fasting (इंटरमिटेंट फास्टिंग) एक प्रकार की आहार पद्धति (Method) है, जिसमें खाने और उपवास के बीच एक निश्चित समय-अंतराल को फॉलो किया जाता है। विगत कुछ वर्षों में इस पद्धति का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। इस पद्धति में मुख्य रूप से इस बात पर फोकस किया जाता है कि आप क्या खाते है और किस समय में खाते है? Intermittent Fasting शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधार करने के साथ शरीर के वजन को भी कम करता है, जिससे सम्पूर्ण स्वास्थ लाभ प्राप्त किया जा सकता है। आज के इस आर्टिकल में हम इसके बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। तो चलिए शुरू करते है:
Contents-कंटेंट्स
इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रकार Types of Intermittent Fasting
इंटरमिटेंट फास्टिंग कई प्रकार के होते है, जिनमे से कुछ प्रमुख एवं लोकप्रिय इस प्रकार से है :
1. 16/8 विधि

16/8 इंटरमिटेंट फास्टिंग की सबसे लोकप्रिय पद्धति है। इसमें प्रतिदिन 16 घंटे उपवास करना होता है और बाकी के 8 घंटे के अंदर ही भोजन करना होता है। जैसे की रात्रि का खाना 8 बजे करते है, तो अगले दिन दोपहर के 12 से रात के 8 बजे के बीच मने ही भोजन कर सकते है। इस बीच आप सिर्फ पानी, ब्लैक कॉफ़ी, छाछ या नारियल पानी पी सकते है।
2. 5:2 विधि

इंटरमिटेंट फास्टिंग की इस पद्धति में सप्ताह में 5 दिन सामान्य भोजन लेना होता है, जबकि 2 दिन में बहुत ही कम भोजन करना होता है। इन दो दिनों में भोजन में अधिकतम 500-600 कैलोरी लेना होता है।
3. वैकल्पिक दिन उपवास (Alternate-Day Fasting)
इंटरमिटेंट फास्टिंग की इस पद्धति में एक दिन सामान्य भोजन किया जाता है जबकि अगले दिन उपवास रखा जाता है। उपवास के दौरान अधिकतम 500-600 कैलोरी का सेवन करना होता है तथा इस दौरान पर्याप्त पानी पीना होता है ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।
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4. OMAD (One Meal a Day)
इंटरमिटेंट फास्टिंग की इस पद्धति में पूरे दिन में केवल एक बार ही भोजन करना होता है। बाकी समय में सिर्फ पेय पदार्थ अर्थात पानी, ब्लैक कॉफ़ी, छाछ या नारियल पानी जरुरत के हिसाब से लेना होता है।
Intermittent Fasting (इंटरमिटेंट फास्टिंग) कैसे काम करता है?
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक भोजन नही करता है, तो उसके शरीर में पहले से जो ग्लूकोज संचित रहता है, उसे ही शरीर की उर्जा के लिए उपयोग करता है। फिर जब ये संचित ग्लूकोज समाप्त हो जाता है, तो शरीर में संचित वसा ही उर्जा के रूप में उपयोग में आने लगता है। इससे शरीर का वजन भी कम होने लगता है और मेटाबॉलिज्म में भी सुधार होने लगता है। परिणामस्वरूप व्यक्ति का शरीर सम्रग रूप से स्वस्थ होने लगता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे Benefits of intermittent fasting
इंटरमिटेंट फास्टिंग के कुछ फायदे इस प्रकार से है :
- वजन कम करने में सहायक : इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने का एक बहुत ही प्रभावी और सरल तरीका है। इसमें शरीर अपने उर्जा के लिए पहले से संचित वसा का उपयोग करता है जिससे शरीर का वजन कम होने लगता है।
- बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता : इंटरमिटेंट फास्टिंग इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है।
- बेहतर हृदय स्वास्थ्य : इंटरमिटेंट फास्टिंग शरीर में उपस्थति खराब कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करके लिपिड प्रोफाइल में सुधार लाया जा सकता है। इससे ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित किया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय के स्वस्थ रहने की संभावना बढ़ जाती है।
- मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में सहायक : इंटरमिटेंट फास्टिंग मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को बढ़ा देता है, जिससे वसा (फैट) बर्न होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
- दिल और मस्तिष्क का स्वास्थ्य : एक अध्यन के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग से दिल और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी कम हो सकता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग के नुकसान Side Effects Of Intermittent Fasting
इंटरमिटेंट फास्टिंग जो एक आहार पद्धति (Method) है, सभी के लिए उपयोगी नही है विशेष कर शारीरिक बिमारियों से ग्रसित व्यक्ति और गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलायों के लिए। इंटरमिटेंट फास्टिंग के बाद बहुत तेज भूख लगती है जिससे जरुरत से ज्यादा खाना खाने की संभावना बन जाती है जिससे शरीर पर इसका प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग के बाद जब आप खाना खाते है तो आपके खाने में आवश्य पोषक तत्व जरुर होने चाहिए यदि पोषक तत्व की कमी रहेगी तो शरीर स्वस्थ होने के बजाये बीमार होने लगेगा।
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अंत में,
इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने, मेटाबॉलिज्म सुधारने के साथ ही साथ संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर करने का एक प्रभावी और बहुत ही सरल तरीका है हालांकि यह हर किसी के लिए उपयोगी नही है इंटरमिटेंट फास्टिंग की कोई भी पद्धति अपनाने से पहले की सलाह अवश्य लें।
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