वायरल बुखार: कारण, लक्षण और इलाज के 11 बेहतरीन घरेलू नुस्खे Viral Fever Cause, Symptoms and home remedies in hindi

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वायरल बुखार या ज्वर कोई बीमारी नही है, एक लक्षण (Symptom) है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है| जो हमें बताता है की शरीर का ताप नियंत्रण करने वाले तंत्र या  प्रणाली ने शरीर का सामान्य ताप बढ़ा दिया है| मनुष्य के शरीर का तापमान सामान्य तौर पर 97.5 डिग्री फारेनहाइट (Fahrenheit) या 36.38 डिग्री सेल्सियस होता है| लेकिन जब शरीर का तापमान इससे अधिक हो जाता है तब वह स्थिति बुखार(Fever) या ज्वर कहलाता है| यह बताता है की हमारा शरीर किसी संक्रमण की चपेट में आ चुका है| लेकिन अगर यह ज्यादा दिनों तक रह जाए तो गंभीर समस्या का सूचक भी है| 

“वायरल बुखार किसी वायरस की चपेट में आने से होता है| यह विशेषकर बदलते मौसम में तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण होता है| जैसे बारिश का मौसम| वैसे लोग जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, विशेष रूप से इसके प्रभाव में आते है|”

आइये जानते है वायरल बुखार के कारण लक्षण और इसके इलाज के घरेलू नुस्खे के बारे में|

क्या है वायरल बुखार? kya hai viral gever in hindi :-

वायरल-बुखार-कारण-लक्षण-और-इलाज

वायरल बुखार बदले मौसम में होने वाली आम समस्या है, जो उन लोगों को विशेष रूप से प्रभावित करता है जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता या इम्यूनिटी (Immunity) कमजोर होती है| जैसे कि बारिश के बाद जो तापमान में उतार-चढ़ाव होते हैं उनके प्रभाव से बुखार के बैक्टीरिया (Bacteria) आसानी से हमारे शरीर में अपना असर कर जाते हैं| इसमें एक इंसान से दूसरे इंसान मे संक्रमित होने का खतरा अधिक हो जाता है| बुखार का ताप ज्यादा होने के कारण तेज पसीना आना, तेज बदन दर्द होना, खाना न खा पाना, इन सब कारणों से इस बुखार में कमजोरी बहुत अधिक हो जाती है|  

वायरल बुखार होने के मुख्य कारण -Main causes of viral fever in Hindi

वायरल बुखार आम तौर पर मौसम के बदलने के कारण इम्यून सिस्टम में जो बदलाव होते है, इनके परिणामस्वरूप होते हैं| वैसे तो इसका कोई विशेष कारण नही है, लेकिन कभी-कभी इसके अलावे और भी कारण हो सकते है जिसके कारण बुखार होता है|

  1.  इम्यून सिस्टम या रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी|
  2.  वायरल बुखार से संक्रमित (Infected) व्यक्ति के साथ रहने के कारण|
  3.  दूषित जल एवं दूषित भोजन के सेवन से|
  4.  किसी भी प्रकार के प्रदूषण से प्रदूषित वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों का शरीर के भीतर जाने के कारण|

उपरोक्त ये कुछ कारण हैं, जो मुख्य रूप से पाए या देखे जाते है|

आइये अब जानते हैं, वायरल बुखार के कुछ लक्षणों के बारे में जिसे देखकर या महसूस करके आप पता कर सकते है कि आपका बुखार “वायरल” है या अन्य कारणों से है|

वायरल बुखार के मुख्य लक्षण Main symptoms of Viral Fever in Hindi :-

वायरल बुखार खासकर बरसात के मौसम में होता है और इन्फेक्शन के कारण एक से दूसरे में जल्द से जल्द फ़ैल जाता है| वायरल बुखार में तेज बुखार, सिर दर्द, तेज बदन दर्द, आँखों में जलन, गले में दर्द के साथ उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत भी रहती है| वायरल बुखार में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता और घटता रहता है| साथ ही खांसी या सूखी खांसी, आँखों और नाक से पानी आना भी सामान्य है| तेज बुखार के कारण पसीना भी बहुत आता है| पसीना ज्यादा आने और शरीर में तेज दर्द के कारण कमजोरी जैसे लक्षणों को देखकर डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए| जिससे जल्द से जल्द इलाज किया जा सके| वायरल बुखार के बाद शरीर काफी कमजोर हो जाता है| गले में दर्द के कारण कुछ भी खाना मुश्किल होता है, साथ ही खाने का टेस्ट भी नही मिलता है| ऐसे में ये बहुत जरुरी हो जाता है कि जल्द से जल्द इसका घरेलू इलाज करके इसके प्रभावों को कम किया जा सके|

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वायरल बुखार के इलाज के 11 बेहतरीन घरेलू नुस्खे 11 Home Remedies of Viral Fever in Hindi :-

आमतौर पर वायरल बुखार से राहत पाने के लिए दवाओं के साथ-साथ घरेलू नुस्खे को भी अपनाया जाता है, क्योंकि वायरल बुखार 4-5 दिनों से लेकर कभी-कभी 10-12 दिनों तक रह जाता है| ऐसे में शारीरिक कमजोरी और इसके प्रभावों को कम करने के लिए कुछ जरुरी घरेलू नुस्खो का प्रयोग ही राहत दिला सकता है|

1. पेय पदार्थों का उपयोग :-

नारियल पानी, इलेक्ट्राल पाउडर, ORS या चीनी और नमक का मिश्रण पानी में मिलाकर लेना| ये सभी पसीने के कारण जो पानी की कमी होती है उसे पूरा करते है| इसका सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करना चाहिए|

2. तलसी के पत्तों का उपयोग :-

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तुलसी में बहुत से ऐसे गुण होते हैं जो हमारे शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते है और बैक्टीरिया या इन्फेक्शन को दूर करने में सहायक होते है| तुलसी के पत्तों का काढ़ा या  तुलसी की चाय लेना जल्द से जल्द बुखार के कारण हुए प्रभावों को कम कर सकता है|

3. धनिया का उपयोग :-

धनिया के बीजों का उपयोग चाय के रूप में कर सकते हैं या फिर पूरी रात धनिये के बीज को एक गिलास पानी में भिंगो दें और सुबह इसे छान लें| फिर इस पानी को गर्म करके पिये| ये बहुत उपयोगी होता है|
 

4. दालचीनी का उपयोग :-

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दालचीनी में कुछ ऐसे तत्व होते है जो एंटी-बायोटिक का काम करता है| चूँकि दालचीनी की तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए इसके चाय का सेवन करने से गले का दर्द, सर्दी-खांसी कम हो जाती है| दालचीनी की चाय बनाने के लिए इसका पाउडर बना लें और गर्म पानी में एक छोटा चम्मच डालकर उबाल लें| आप चाहें तो अपने टेस्ट के लिए इलाइची और थोड़ी शहद भी मिक्स कर सकते हैं| इस चाय को गरमा-गरम पीने से बहुत फायदे होते है|
 

5. किशमिश के पानी का उपयोग:-

किशमिश के 10-15 दाने एक गिलास पानी में रात भर भिंगोने के लिए छोड़ दे| सुबह खाली पेट इसका उपयोग करें और इसके फायदे देखें| पहले किशमिश को चबाकर खा लें और फिर उस पानी को पी लें| इसका उपयोग पूरे शरीर में एनर्जी देता है, जिससे कमजोरी दूर करने में सहायता मिलती है|

6. मेथी के पानी का उपयोग :-

सबसे पहले एक चम्मच मेथी के दाने को एक ग्लास पानी में पूरी रात के लिए भिंगो दें और सुबह इस पानी को छान लें| अब इस पानी को पिये, ये बहुत ही फायदेमंद होता है|

7. अदरक का उपयोग :-

सबसे पहले थोड़ी सी मात्रा में अदरक लें, और इसे साफ करके इसकी चाय बनाकर पिये| चूँकि अदरक की तासीर बहुत ही गर्म होती है, इसलिए इसका सेवन बहुत अधिक मात्रा में नही करना चाहिए| अदरक को चाहे तो चाय के रूप में उपयोग करें या इसके रस को निकालकर शहद के साथ मिलाकर प्रयोग करें| ये गले और बदन दर्द को कम करने में सहायक होता है|

8. लौंग, नींबू और शहद का उपयोग :-

एक गिलास पानी में लौंग या लौंग के चूर्ण डाले और इसे तब तक उबाले जब तक पानी आधा न हो जाए| फिर इसमें शहद और नींबू का रस मिलाकर पिएं| ये चाय आपको दर्द से राहत के साथ-साथ कमजोरी दूर करने में भी सहायता देगा|

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9. सौंठ, हल्दी और काली मिर्च की चाय का उपयोग :-

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सौंठ का मतलब होता है  सुखा हुआ अदरक| इसकी पाउडर थोड़ी मात्रा में लें, फिर गर्म पानी में सौंठ, हल्दी और कालीमिर्च का चूर्ण मिक्स कर लें और फिर इन सबको उबाल कर चाय बना लें| अब इसमें थोड़ी सी शहद मिक्स कर लें| अगर आप मीठे के बजाए नमकीन पसंद करते हों तो शहद के बजाए काला नमक या जलजीरा पाउडर मिक्स कर लें| इस चाय का आपको बहुत फायदा तो देगा ही, साथ ही साथ मुँह के स्वाद को भी ठीक कर देगा|

10. सब्जियों के सूप का उपयोग :-

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सब्जियों के गरमा-गरम सूप आपको पौष्टिक तत्वों के साथ-साथ मुँह के टेस्ट को भी ठीक करते है और आपके पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करते है|

11. फलों के जूस का उपयोग :-

वायरल फीवर में फलों का ताजा जूस आपके शरीर के पानी के कमी को ठीक करने के साथ-साथ विटामिन, प्रोटीन इत्यादि जैसे पोषक तत्वों के कमी को भी पूरा करेगा|

“वायरल फीवर” वैसे तो बहुत घबराने या लाइलाज जैसी बीमारी नही है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप इसके प्रभाव से जल्द ही छुटकारा पा सकेंगे|

नोट :- वायरल बुखार में उबाल कर ठंडा किया हुआ पानी, हल्के और सुपाच्य भोजन (खिचड़ी, दलिया, सूप, ओट्स, पोहा, उपमा और जूस जैसी चीजों का उपयोग करके जल्द से जल्द ठीक हो सकते है| इसके साथ ही साफ-सफाई का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए, जिससे इस बुखार से होने वाले दुष्परिणामों से बचाव किया जा सके|

   तो, दोस्तों वायरल बुखार के कारण लक्षण और इसके इलाज के घरेलू नुस्खे के बारे में आपको मेरे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी, हमे कमेंट करके जरुर बताएं और साथ ही जानकारी अच्छी लगे तो अपने दोस्तों में शेयर भी करें। ऐसे ही रोचक जानकारियों के लिए हमसे जुड़े रहे है

धन्यवाद |

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