थायरायड (Thyroid) : कारण, लक्षण , इलाज एवं सटीक घरेलू उपचार

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आज के समय में बीमारी उम्र देख कर नही आती है, वजह है हमारी जीवनशैली। हम अपने जीवन में इतना ज्यदा व्यस्त हो गये है की अपने आप पर ध्यान देने का समय ही नही निकाल पाते, जिसके कारण कई सारी बीमारियाँ हमे ग्रसित कर लेती हैउनमे से ही एक बीमारी है थायरायड (Thyroid)ऐसे देखा जाए तो यह बीमारी वर्त्तमान समय की एक आम समस्या है, जिससे हमारे देश के लगभग एक तिहाई जनसंख्या ग्रसित है। 

थायरायड कारण, लक्षण और घरेलू उपचार Thyroid karan, lakshan, aur gharelu upchar in hindi  

थायरायड (Thyroid) क्या है? Thyroid kya hai in hindi?

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थायरायड मानव शरीर में पायी जाने वाली सबसे बड़ी अंत:स्रावी ग्रंथि है जिसे हिन्दी में “अवटु ग्रंथि” भी कहा जाता है। थायरायड एक ऐसी बीमारी है जो मनुष्य में शारीरिक एवं मानसिक दोनों ही तरह की समस्याओं को उत्पन करती है। “दिल्ली स्थित फोर्टिस अस्पताल के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉक्टर रितेश गुप्ता के मुताबिक हमारे गले में अखरोट के आकार की थायरायड ग्लैंड होती है, जो दो तरह के थायरायड हार्मोन T 3 और T 4 बनाती है”। यह शरीर की सबसे जरुरी ग्रंथि होती है, जो कई चीजों को कंट्रोल में रखती है। जैसे अच्छी नींद, स्वस्थ पाचनतंत्र, मेटाबॉलिज्म, लीवर फंक्शन, शरीर का तापमान नियमित और नियंत्रित रखने के साथ-साथ उसका विकास इत्यादि। आप थायरायड ग्रंथि को शरीर रूपी इंजन का सेंट्रल गियर मान सकते है। थायरायड ग्रंथि से हार्मोन्स का स्राव संतुलित होगा तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा। परंतु थायरायड हार्मोन्स जरुरत से ज्यादा या कम बनने लगे, तो दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं। महिलायों में इसके कारण गर्भधारण या इनफर्टिलिटी और माहवारी(पीरियड्स) जैसी समस्याएं उत्पन होने लगती है

थायरायड के प्रकार 

थायरायड मुख्य रूप से दो तरह के होते है हाइपरथायराइडिज्म एवं हाइपोथायराइडिज्म

(1) हाइपरथायराइडिज्म 

इसमें वजन बढ़ने की समस्या मुख्य है। इसमें हाथ-पांव में सूजन, भूख कम लगना, सुस्ती और ठंड लगने जैसी परेशानी रहती है। मासिकधर्म(पीरियड्स) में गड़बड़ी और याददाश्त में कमी जैसी कुछ मुख्य लक्षण है जो हाइपरथायराइडिज्म में दिखते है

(2) हाइपोथायराइडिज्म

इसमें मरीज का वजन कम होने लगता है और भूख ज्यादा लगने लगता है। तनाव, ध्यान भटकना या केंद्रित ना कर पाना, धडकनों का किसी भी बात पर तेज-तेज धड़कना, बिना वजह भी घबराना, रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) की समस्या, पसीना अत्यधिक आना, मासिकधर्म की परेशानी, नींद में कमी, गैस अधिक बनना, थकान को मिटाने के लिए बार-बार भूख महसूस होना या कुछ ना कुछ खाने की इच्छा होना, यूरिन इन्फेक्शन और बार-बार यूरिन आना, ये सब कुछ मुख्य लक्षण है जिससे पता लगता है की आपको हाइपोथायराइडिज्म है

नोट :- ऊपर वर्णित लक्षणों को थायरायड के ही लक्षण मानने से पहले डॉक्टर से मिलें और इसका टेस्ट करा लें क्योंकि टेस्ट रिपोर्ट के बिना आप पूरी तरह से आश्वस्त नही हो सकते है कि आप थायरायड से ही पीड़ित है

आज के समय में थायरायड की समस्या महिलायों में ही नही कम उम्र के बच्चों और पुरुषों में भी हो रही है। इसकी कोई विशेष उम्र नही होती है। डॉक्टर्स के मुताबिक पिछले कुछ दशक में महिलायों में थायरायड की समस्या विकराल रूप से सामने आ रही है। 30 से 35 उम्र की महिलायों को ज्यादा सचेत रहने की जरुरत है, क्योंकि इस उम्र में हार्मोन्स में असंतुलन के लक्षण ज्यदा दिख्नते हैं, जो थायरायड ग्रंथि को प्रभावित करते है। दिल्ली स्थित जयपुर गोल्डन अस्पताल  के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉक्टर अवनीश अग्रवाल के मुताबिक थायरायड डिसऑर्डर से सबंधित शुरुआती परेशानियां इतनी आम होती है कि ज्यादातर लोग इसके लक्षणों को नही पकड़ पाते हैं। ऐसे में वे दुसरे इलाज का विकल्प ढूढने लगते है। जब तक आप टेस्ट कराते है, तब तक ये बीमारी शरीर में अपनी जगह बनाकर अपना प्रभाव शुरू कर चुका होता है

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थायरायड के कारण – Thyroid ke karan in hindi  

(1) हार्मोन का असंतुलन :

हार्मोन का असंतुलन थायरायड को बढ़ाने या होने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर के सभी हार्मोन्स एक-दूसरे से जुड़े होते  है और एंडोक्राइन ग्रंथि में असंतुलन भी थायरायड के कारणों में से एक है। एस्ट्रोजन की कमी जैसे असंतुलन थायरायड के होने वाले कारणों में से एक है 

(2) मानसिक तनाव :

जरुरत से ज्यादा मानसिक तनाव थायरायड के होने वाले कारणों में से एक हैकिसी भी छोटी सी बात को बहुत जयादा सोचना और बिना वजह हर बात की टेंशन थायरायड के होने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। आजकल की भाग-दौड़ की जिंदगी में हर क्षेत्र में चुनौती (Competition) के कारण भी लोगों को तनावपूर्ण जिंदगी जीनी पड़ रही है। ऐसे में कोशिश करें की जितना हो सके अपने आप को खुश रखने की कोशिश करें

(3) गर्भावस्था  :

गर्भावस्था में बहुत सरे बदलाव होते है, चाहे वे शारीरिक हो या मानसिक। ऐसे में हार्मोन्स के बदलाव और बहुत सारे बदलाव के साथ थायरायड भी होने के सम्भावना बढ़ जाती है। बहुत सारी ऐसी महिलाएं जिन्हें पहले से थायरायड नही होती है, लेकिन गर्भावस्था में हुए बदलाव के कारण उन्हें थायरायड की बीमारी हो जाती है

(4) आनुवांशिकता के कारण :

बहुत सारे लोगों में आनुवंशिकता के कारण थायरायड की समस्या हो जाती है। अगर आपके परिवार में माता-पिता या किसी भी रिश्तेदार को (जिनके जीन के कारण आपको भी हो सकता है) है तो आपको भी होने की पूरी संभावना होती है। ऐसे में सावधानियां बरतनी चाहिए, जिससे होने की संभावना कम हो

(5) आयोडीन का असंतुलन :

थायरायड में आयोडीन अपनी महतवपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में शरीर में आयोडीन की कमी या अधिकता दोनों में कोई भी हो तो थायरायड होने के के मुख्य कारणों में से एक है

(6) मोटापा के कारण :

वैसे तो मोटापा शरीर के लिए हर तरह की बीमारियों को लाने का रास्ता या मुख्य कारण है। मोटापे से होने वाली बीमारियों में से एक थायरायड भी है। अगर इंसान अपने शरीर को सक्रिय न रखे तो मोटापा से ग्रसित हो जाता है और उसे तरह-तरह की बीमारियों घेर लेती है

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(7) सेलेनियम की कमी :

सेलेनियम लीवर में T4 को संतुलित करके T3 में बदलने के लिए अति आवश्यक है। इसकी कमी से भी थायरायड होने की संभावना बढ़ जाती है 

थायरायड से बचाव 

(1) थायरायड की समस्या ज्यादातर महिलायों में ही देखने को मिलती है। पुरुषों में महिलायों की तुलना में यह बीमारी कम पायी जाती है। इंडियन थायरायड सोसाइटी से प्राप्त आँकड़ो के मुताबिक भारत में करोड़ों से ज्यादा लोग थायरायड के मरीज है, जिनमें से महिलायों की संख्या लगभग 60 % है।

(2) थायरायड की गोलियां नियमित रूप से सुबह खाली पेट लेनी होती है, जो इसके दुष्प्रभाव को कम करके शरीर को फायदा ही पहुचाते है। जिससे मोटापा और थकान भी कंट्रोल में रहता है।

(3) थायरायड के बीमारी को आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों से भी कंट्रोल किया जा सकता है। अश्वगंधा, प्रो बायोटिक थायमिन और विटामिन बी युक्त पदार्थ, सेलेनियम वाली चीजों का अधिक से अधिक सेवन, अदरक, नारियल का तेल, अलसी के बीज, मुलेठी और साबुत अनाजों का सेवन बहुत ही फायदेमंद साबित होते है। 

(4) थायरायड में योगासन और प्राणायाम के प्रतिदिन अभ्यास से भी इस बीमारी में बहुत राहत मिलती है। कपालभाति, उज्जयनी और भस्त्रिका प्राणायाम थायरायड के नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से आवश्यक है। इसके साथ ही और भी योगासन है जो थायरायड में बहुत ही प्रभावी होते है। जैसे :- सिंहासन, हलासन, नौकासन, धनुरासन और मत्स्यासन इत्यादि।  

थायरायड के लिए घरेलू नुस्खे 

सबसे पहले कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों को जानते है जिनके उपयोग से हम थायरायड के प्रभाव को कम कर सकते है। आयुर्वेदिक तरीके से तैयार किए गए घरेलू नुस्खें शरीर पर कोई गलत प्रभाव भी नही छोड़ते और ये बहुत फायदेमंद भी होते है

1. अश्वगंधा :-

 

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इसका एक या दो कैप्सूल (500 mg) का प्रतिदिन सेवन थायरायड में बहुत फायदेमंद होता है। 

2. मुलेठी :-

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थायरायड के मरीजों को थकान बहुत जल्दी महसूस होने लगती है और वे जल्दी थक जाते है। ऐसे में मुलेठी का सेवन उनकी थकान को ऊर्जा में बदल देता है। मुलेठी में कुछ ऐसे तत्व भी पाए जाते है, जो थायरायड ग्रंथि को संतुलित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 

3. आंवला :-

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आंवला का सेवन वैसे तो हरेक बीमारी में फायदेमंद होता है, लेकिन यह थायरायड में भी अति लाभकारी साबित होता है। इसका चूर्ण एक गिलास गुनगुने पानी में मिक्स कर लें और इसका सेवन प्रतिदिन एक से दो बार अवश्य करें। इससे गैस और कब्ज की समस्या से भी मुक्ति मिलती है, जिससे थायरायड को संतुलित रखनें में सहायता मिलती है।

4. एलोवेरा :-

एलोवेरा को थायरायड के लिए अति लाभकारी माना गया जाता है। एक रिसर्च के अनुसार अगर थायरायड के रोगी एलोवेरा का जूस प्रतिदिन सेवन करें तो यह थायरायड ग्लैंड की सक्रियता को बढ़ाने में मददगार साबित होता है। इसे प्रतिदिन एक बार गुनगुने पानी के साथ 50 ml तक सेवन किया जा सकता है। 

5. सेव का सिरका :-

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सेव का सिरका थायरायड के इलाज में रामबाण साबित हो सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार सेव का सिरका बढे हुए ब्लड शुगर और लिपिड को नियंत्रित करके मोटापे को नियंत्रित करने में सहायक होता है। दो चम्मच सेव का सिरका और एक गिलास गुनगुना पानी मिक्स करके उसे खाली पेट इस्तेमाल करें। आप चाहे तो इसे सुबह और शाम दोनों समय खाने से करीब एक या आधा घंटा पहले ले सकते है।  

थायरायड का इलाज कैसे करें? Thyroid ka  kaise karen in hindi?

थायरायड से ग्रसित लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी गलें में ही होती है। चूँकि इसकी ग्रंथियां गले में ही पायी जाती है , इसलिए गला ज्यादा प्रभावित होता है। (हालांकि ये पूरे शरीर पर अपना प्रभाव डालता है) ऐसे में हम सब यह चाहते है की इससे “निजात मिले या इसका प्रभाव कम हो।” तो आइये जानते है कि थायरायड हो जाने पर क्या-क्या करना चाहिए।

(1) ब्लड टेस्ट कराना :-

ब्लड टेस्ट के जरिए ही हमें पता चलता है की इसका सही नाप क्या है। इसके लिए TSH, T3 और T4 का टेस्ट किया जाता है और इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर डॉक्टर्स हमे दवाई देते है और इलाज करते है।

(2) दवाई लेना :- 

थायरायड के टेस्ट रिपोर्ट्स के बाद डॉक्टर हमे कुछ दवाईयां देते है जो इसके प्रतिकूल प्रभाव को काम करने में सहायक होते है। इन दवाईयों का सेवन पूरे जीवन भर करना पड़ता है। प्रतिदिन सुबह खाली पेट इन दवाईयों का सेवन किया जाता है। डॉक्टर्स हमें इन दवाईयों की मात्रा टेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार बताते है और हमें उतनी ही मात्रा लेनी चाहिए। जिससे हम इसके दुप्रभाव से बच सकें।

(3) सर्जरी कराना :-

जब दवाईयों से यह कंट्रोल नही हो पाता तो डॉक्टर्स सर्जरी की सलाह देते है। ऐसे में Thyroidectomy सर्जरी के द्वारा थायरायड का इलाज किया जाता है, जो बहुत ही अच्छे डॉक्टर की निगरानी में ही करानी चाहिए। इस सर्जरी के द्वारा सर्जिकल तरीके से “थायरायड ग्रंथि (Thyroid gland)” को निकाल दिया जाता है।

थायरायड के मरीजों के लिए आहार नियोजन 

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  • थायरायड के रोगी को दाल, सब्जियों और फलों का सेवन, दूध, दही, नारियल पानी, नारियल तेल से बने भोजन, ब्राउन राइस, आजवाईन, ग्रीन टी, काली मिर्च, कम तेल-मसालेयुक्त भोजन का सेवन करना चाहिए।
  • मैदा, तेल-मसालेयुक्त चीजें, फास्टफूड, डिब्बाबंद चीजें, कोल्डड्रिंक या सॉफ्टड्रिंक, फ्रिज किए हुए ठंढे पदार्थ (पानी या कोई भी खाद्य पदार्थ) इत्यादि इन चीजों का सेवन नही करना चाहिए। 
  • मांस-मछली एवं अंडे का सेवन निश्चित मात्रा में ही करना चाहिए।
  • गैस बनाने वाले एवं मोटापा बढ़ाने वाली चीजों से परहेज करना चाहिए।
  • आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन थायरायड के रोगियों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके लिए फलों एवं सब्जियों का भी सहारा ले सकते है जिनमें आयोडीन की मात्रा भरपूर हो। इनमें से ही एक है स्ट्राबेरी जिसमे आयोडीन भी थोड़ी मात्रा में पायी जाती है। इसलिए इसका सेवन थायरायड के रोगियों के लाभकारी है।  

तो दोस्तों कैसी लगी आप सबको मेरे द्वारा दी गई जाकारी अगर अच्छी लगे तो प्लीज़ कमेंट करें और साथ ही अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें। ऐसी ही जानकारी के लिए मुझे फॉलो जरुर करें।       

डिस्क्लेमर :- आर्टिकल में सुझाए गए इलाज के तरीके केवल सामान्य जानकारी प्रदान करते हैं | इन्हें आजमाने से पहले किसी विशेषज्ञ अथवा चिकित्सक से सलाह जरूर लें 

धन्यवाद

 

   

 

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