पारिजात: इसके औषधिय गुण और धार्मिक महत्व

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पारिजात-इसके-औषधिय-गुण-और-धार्मिक-महत्व

अभी हाल ही में अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन से पहले हमारे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने राम जन्म भूमि स्थल पर पारिजात का पौधा लगाया।

क्या आपको पता है कि “पारिजात” का एक प्रचलित नाम “हरसिंगार” भी है। मान्यता है कि सीता जी वनवास के दौरान अपना श्रृंगार इसी के फूलो से करती थीइसिलिय इसे हरसिंगार भी कहा जाता है। साथ ही साथ ही यह अत्यंत मोहक मनभावन खुशबु से भरी होती है और कुछ धार्मिक मान्यताओ के अनुसार यह अतिपावन और पूजनीय भी है।

तो आइये आज यह जानने की कोशिश करते है कि आखिर यह पौधा है क्याइसकी महत्ता क्या हैइसका औषधीय और धार्मिक गुण क्या है जो माननीय प्रधानमंत्री जी ने यह पौधा लगाया?

पारिजात क्या है?:

धार्मिक मान्यताओ के अनुसार पारिजात” वृक्ष की उत्पति समुंद्र मंथन के दौरान हुई थी और यह देवताओ को मिला जिसे स्वर्ग में इंद्र ने अपनी वाटिका में लगाया था श्रीकृष्ण जी के द्वारा नरकासुर का वध किये जाने के परिणाम स्वरुप इंद्र ने पारिजात का पुष्प उन्हें भेट किया थाइसके उपरांत श्रीकृष्ण जी ने अपनी पत्नी सत्यभामा की जिद के कारण युद्ध में इंद्र को पराजित करके इसे स्वर्ग से पृथ्वी पर ले आए चूकि यह पौधा पराजित करके लाया गया था इसीलिए इसे पारिजात भी कहा जाता है इन्ही सब कारणों से हिन्दू धर्म में इस पौधे का विशेष महत्व हैकहा तो ये भी जाता है की पारिजात का फूल भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को अति प्रिय हैक्योकि लक्ष्मी जी भी समुंद्र मंथन से प्रकट हुई थी मान्यता यह भी है इसी  फूल के प्रभाव से श्रीकृष्ण जी की पत्नी रुक्मिणी चिरयौवना हो गयी थी कहते है कि पारिजात” के फूलो को तोड़ना नही चाहिएइसके जो फूल खुद ही टूटकर गिर जाते हैउसे ही  भगवान को चढ़ाना चाहिएइसके फूलो की खुशबू ऐसी होती है कि इसके सुगंध से ही सारी थकान मिट जाती है और मन प्रसंचित हो जाता है पारिजात के फूल सिर्फ रात में ही खिलते है और सुबह से शाम होतेहोते मुरझा भी जाते है चूकि ये सिर्फ रात में ही खिलते है और अपनी खुशबू से सारे वातावरण को सुगन्धित कर देते हैइसलिए इसे रात की रानी” भी कहा जाता है 

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परिजात का वानस्पतिक नाम निक्टेंन्थिस आर्बर-ट्रिस्टिस” है और इसका अंग्रेजी नाम नाईट जैस्मिन” है इसे अलगअलग जगहों पर भिन्नभिन्न नामो से जाना जाता है जैसे: रात की रानीशेफालीशिउली इत्यादि यह पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प है

पारिजात की खेती :-

पारिजात की व्युत्पति परिनाहा समुद्रधर जधो व पारिजात” समुद्र से हुई थी यह ज्यादातर नेपाल के उपोष्णकटिबंधीय हिमालय और भारत के दक्षिणी हिस्सों में पाया जाता है दुनिया भर में उषणकटिबंधीय क्षेत्रो में व्यापक रूप से खेती की जाती है इस पौधे की खासियत यह है कि इसके प्रत्येक भाग को विभिन्न रूपों में विभिन्न तरह की चिकित्सा के उद्देशय से प्रयोग किया जाता है इसके पत्तों में व्यापक रूप से स्पेक्ट्रम औषधीय गुण होते हैजैसे कि antibacterial anti inflametry, antipyretic और  antitelihatic  प्रभाव होता है आयुर्वेदिक साहित्य में निवास स्थानआकृति विज्ञानव्युत्पतिपारंपरिक औषधीय विज्ञानचिकित्सीय उपयोग आदि का वर्णन बड़े पैमाने पर मिलता है

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पारिजात के पौधे आमतौर पर 10 से 15 फिट ऊँचे होते हैलेकिन कहींकहीं इसकी ऊँचाई 25 से 30 फिट भी होती है

पारिजात की 10 महत्वपूर्ण विशेषताए :

(1) पारिजात का पेड़ आमतौर पर 10 से 15 फिट ऊँचा होता है लेकिन कहींकहीं इसकी ऊँचाई 20 से 25 फिट ऊँची होती है।

(2) इसके पौधे पर लगने वाला फूल बेहद ही सुन्दर और आकर्षक होता है। इसके फूल छोटे छोटे होते है जिसमें फूल तो सफ़ेद होता है लेकिन उसका डंठल केसरिया रंग का होता है। इसके फूलो की खुशबु से मन अति प्रसन्नचित हो जाता है और जिन्हें कोई मानसिक परेशानी हो उनका भी मन एकाग्रचित हो जाता है।

(3) पारिजात के पेड़ पर काफी मात्रा में जल्दीजल्दी फूल लग जाते हैइतना ही नही अगर इसके फूल को रोजाना भी तोड़ा जाए फिर भी अगले ही दिन यह पेड़ फूलो से भरा –भरा हो जाता है। पौराणिक मान्यताओ के अनुसार ऐसा कहा जाता है की पारिजात के फूल टूटते है तो पेड़ से थोड़ी दूर अलग ही गिरते है और यह सच भी है।

(4) पारिजात के पौधे की एक अलग खासियत यह है की इसकी टहनियाँ ज्यादा ऊपर नही जाती है और अगर पृथ्वी को छू भी जाये तो सुख जाती है।

(5) पारिजात के फूल या फलो के रस का सेवन अगर साल में एक या दो बार किया जाये तो ह्रदय रोगों (Heart disease) से बचा जा सकता है।

(6) प्रतिदिन इसका सेवन करनेवाला चिरयौवना या जवान बना रहता है।

(7) इसके फूलो की खुशबू ऐसी मनमोहक और तेज होती है जिसके कारण इसका उपयोग इत्र और अगरबत्ती बनाने में भी किया जाता है। इसके फूलो का उपयोग रंग बनाने में भी किया जाता है। इसके फूलो से बने पीले रंग को कपडे के रंगने में डाई के रूप में प्रयोग किया जाता है।

(8) पूर्वोतर राज्य “असम” में इसके फूलो और कोमल पत्तियों का उपयोग कई तरह के खाद्य पदार्थो एवं व्यंजनों को बनाने में किया जाता है।

(9) इसका फूल मूत्रवर्धकएंटी-ऑक्सीडेंट और इसकी पत्तिया एंटी-बैक्ट्रियलएंटी- इन्फ्लेमेंट्रीएंटी-पैरेटिक और एंटी-फंगल होती है।

(10) इसके पत्तों का रस खरा और कड़वा होता है। इसलिए इसका प्रयोग त्वचा की बीमारियों में भी किया जाता है। इसका उपयोग तरह-तरह के ‘’फेस पैक’’ बनाने में भी किया जाता है। यह त्वचा के रोगों में भी लाभकारी होता है।

पारिजात का औषधीय गुण :–

पारिजात के पौधे में बहुत से औषधीय गुण होते है बहुत सी बीमारियों में इसका प्रयोग अत्यंत ही लाभकारी होता है आइए हम जानते है की इसका प्रयोग किस बीमारी में किस तरह से करना चाहिए जिससे इसका लाभ मिले सके

यह बुखारचिकनगुनियासाइटिकाआर्थराइटिसपेट सम्बंधित परेशानियाशारीरिक दुर्बलता और बच्चों की मानसिक क्षमता को बढाने में भी लाभकारी होता है

(I) बुखार में पारिजात का उपयोग :-

अगर बहुत दिनों से बुखार हो और उसमे सुधार नही हो रहा हो तो ऐसी स्थिति में पारिजात/हरसिंगार का उपयोग जरुर करना चाहिए इसके पेड़ की थोड़ी सी छाल और 5-7 पतियो को ले ले और इसे 3-4 तुलसी की पत्तियों के साथ उबालकर नियमित रूप से पिये तो इसके प्रभाव से बुखार उतर जाता है और बुखार के वजह से जो कमजोरी हुई हो वो भी दूर हो जाती है

(II) चिकनगुनिया में पारिजात:-

अगर चिकनगुनिया की बीमारी हो तो दवाओ के साथ-साथ पारिजात के पतों को 3 से 4 दिन उबालकर पी लिया जाये तो यह बहुत ही लाभकारी साबित होता है  कभीकभी यह बिल्कुल ठीक भी कर देता है

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(III) साइटिका में पारिजात:-

साइटिका कमर से शुरू होकर पैरो तक जानेवाले दर्द की समस्या हो और इसके कारण चलनेफिरने में भी समस्या हो तो हरसिंगार के 3-4 पतियों को कूटकर दो गिलास पानी में उबाल ले और सुबहशाम पीये तो साइटिका या गृध्रसी या रेंगनबाई की बीमारी में भी आराम मिलता है

(IV) आर्थराइटिस में पारिजात:-

आर्थराइटिस में इसका प्रयोग अति लाभकारी होता है  एक गिलास पानी में 5-6 पतों की चटनी बनाकर डाल दे और उसे उबालकर आधा कर ले फिर उसे ठंढा होने के लिय रात भर छोड़ दे और सुबह खाली पेट इसका सेवन करे तो कितना भी पुराना आर्थराइटिस का दर्द हो ठीक हो जाता है एक बात का ध्यान रखे की इसं काढ़े को बनाने की प्रक्रिया रात में ही पूरी कर ले जिससे यह पूरी तरह ठंढा हो जायेक्योकि अगर इसे गरम पिया जाये तो यह शरीर को और भी गरम कर देता है इसका कारण है की इसकी तासीर बहुत ही गरम होती है और पतों से बनी हुई चटनी को बिना छाने हुए पीना चाहिए तभी यह फायदेमंद होता है यह गठिया के रोगों में भी अत्यंत लाभकारी होता है

(V) पेट सम्बन्धी समस्या में पारिजात:-

यदि पेट में कब्ज की समस्या हो तो इसके बीजो का उपयोग करने से लाभ मिलता है अगर बच्चों के पेट में कीड़ा या कृमि हो गया हो तो उसे खत्म करने में यह अति सहायक होता हैक्योंकि पारिजात कृमिनाशक पौधा भी है इसके लिए पारिजात के पतों का रस 2 चम्मच और इसके साथ थोड़ा मिश्री या गुड़ डालकर सुबह खाली पेट पिला दिया जाये तो यह कीड़ो का नाश कर देता हैअगर बच्चा ज्यादा छोटा हो तो एक ही चम्मच पिलाना चाहिएक्योकि एक तो यह काफी गरम होता है और दूसरा ये बहुत ही कड़वा होता है इसके नियमित प्रयोग से कुछ ही दिनों में कीड़ो का नाश हो जाता है और बच्चे कृमि मुक्त हो जाते है पुरे साल में अगर बच्चों को एक या दो बार पिला दिया जाये तो कृमि या कीड़ो से सम्बंधित परेशानी उन्हें कभी नही होगी

(VI) शारीरिक शक्ति बढ़ाने में भी उपयोगी:-

इसका पौधा शारीरिक शक्ति बढाने के लिए भी अधिक लाभकारी है इसके फूल को छाया में सुखाकर उसका पाउडर बना लेफिर इसमें 200-250 mg से लेकर 500 mg मिश्री मिलाकर नियमित रूप से सेवन किया जाए तो इससे शरीर की शक्ति व् चुस्ती-फुर्ती बढ़ जाती है और शारीरिक उर्जा में भी वृद्धि हो जाती है

(VII) शारीरिक दर्द दूर करने में लाभकारी:-

यदि शरीर में दर्द और साथ ही सूजन भी हो तो पारिजात/हरसिंगार की छाल को पानी में उबालकर सुबह-शाम नियमित रूप से पीने से दर्द और सूजन भी ठीक हो जाता है इस काढ़े का उपयोग दर्द और सूजनवाले स्थान पर नमक के साथ सेकने के लिए भी किया जाए तो ये बहुत लाभकारी होता है 

(VIII) कफ या खाँसीसर्दी और बलगम में उपयोगी:-

अगर सर्दीखाँसीबलगम और कफ की समस्या हो तो इसके पत्तों का प्रयोग हर्बल टी के रूप में भी कर सकते है यह अत्यंत लाभकारी होता है इसके लिए हरसिंगार की 2-3 पत्तियोंएकदो फूल और तुलसी के कुछ पतों को डालकर चायपत्ती के साथ उबाले  इस काढ़े या हर्बल टी को पीने से ये सारी परेशानियाँ ठीक हो जाती है 

(IX) मानसिक क्षमता को बढाने में सहायक:-

दोस्तों सभी मातापिता यही चाहते है की हमारे बच्चें हमेशा खुश रहेएकाग्रचित रूप से पढ़ाई करे और हर एक जगह सफल होलेकिन कभीकभी कुछ बच्चों में इसके विपरीत ही होता हैजैसे:- जल्दी क्रोधित होनापढाई में एकाग्रचित नही होनानकारत्मक विचारो का होनामूड बदलना या स्विंग करना इन सब परेशानियों से मुक्ति दिलाता है यह पौधा अगर आपके बच्चो में ये परेशानियाँ हो तो आप इसका एक पत्ता प्रतिदिन खिलायें तो इन परेशानियों से बचा जा सकता है प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक पत्ता खाने से यह मानसिक परेशानियाँ दूर करता है इसका सबसे बड़ा कारण यह है की पारिजात में रक्तशोधन (blood purifying) की क्षमता होती हैजो हमारे मानसिक तथा शारीरिक विकास के लिय अति महत्वपूर्ण है

अन्तत: दोस्तों आपसे यही कहना चाहती हूँ की इस दैवीयपावनधार्मिक और सबसे बड़ी बात औषधि से भरपूर इस पौधे को अपने घरआंगन या आसपास के बगीचे में लगाये और इसकी मनमोहक खुशबू से भरे सर्वगुण संपन्न पौधे के गुणों का लाभ उठाये इसकी फूलो की खुशबू से वातावरण तो महकता ही हैसाथसाथ वास्तुदोष भी दूर हो जाता है दोस्तों इस पौधे को जरुर लगाइये और इसका लाभ उठाकर अपनी काया को निरोगी रखिए

 

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