योगासन : एसिडिटी (गैस) का रामबाण इलाज कैसे करें

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हमारा शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है जल, वायु, अग्नि, भूमि, आकाश और इनमे से ये सभी आवश्यक है। इन्ही महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है “वायु तत्व”। वायु को बोलचाल की भाषा में गैस या एसिडिटी भी कहते है। हमारे शरीर में जब इस तत्व का असंतुलन होता है, तब कई प्रकार की समस्याएँ उत्पन हो जाती है।

पेट में गैस बनने के लक्षण 

  • पेट में गैस बनने के कुछ मुख्य लक्षण है :
  • खट्टी डकारे आना
  • पेट दर्द होना
  • बार–बार गैस पास होना या गैस पास होने में दिक्कत होना
  • सिर दर्द, बदन दर्द, मन में बेचैनी एवं अस्थिरता होना
  • एसिडिटी बढ़ना
  • अपच होना
  • कब्ज होना
  • अल्सर होना

 गैस होने से हमे तरह-तरह की बीमारियाँ होने लगाती है। इन बीमारियों से बचने के लिय हम कुछ योगासनों का प्रयोग कर सकते है।   योगा हमारे जीवन में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योगा को दैनिक जीवन में शामिल करके हम तरह–तरह की बीमारियों से बच सकते है। गैस की समस्या में भी हम खान-पान के साथ योगा को भी शामिल कर ले तो बहुत ही जल्द इस समस्या से छुटकारा पा सकते है।

दोस्तों जिन्हें भी गैस की समस्या हो उन्हें रात्रि के समय गरम दूध, केला, चावल, तेज मिर्च–मसाले और भारी खानपान से बचना चाहिए।

 

एसिडिटी(गैस) के लिए योगासन Gas ke liye yoga in hindi 

योग का नियमित अभ्यास बहुत सारे शारीरिक विकारों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइये जानते है पेट में बनने वाले गैस को दूर करने वाले इन 10 मुख्य योगासन के बारे में जिनका नियमित उपयोग गैस के लिए किसी रामबाण है।

 गैस के लिए 10 उपयोगी योगासन  Gas ke  liye 10 upyogi yogasan in hindi :-

1. पवनमुक्तासन : – 

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पवनमुक्तासन

 

पवनमुक्तासन गैस और कब्ज के लिय मुख्य आसनोंमें से एक है। पवनमुक्तासना का अर्थ होता है “पवन का मतलब होता है हवा” और मुक्तासना का अर्थ होता है ऐसा आसन जिसमे मुक्त किया जाए या छोड़ा जाए पवनमुक्तासन करने के लिए किसी विशेषता की जरूरत नही होती है न ही ये बहुत कठिन होता है  इसे थोड़े से प्रयास से बच्चे और बुजुर्ग भी कर सकते है|

पवनमुक्तासान करने के तरीके –

सबसे पहले सीधे लेट जाए और अपने दोनों पैरो को घुटनों से मोड़े। फिर दोनों हाथो की उंगलियों को इंटरलॉक करके घुटनों के पास रखे और पैरो पर दबाब डाले,जिससे की पेट पर दबाब बन सके या महसूस हो।  अब सर को उठाते हुए अपनी ठुड्डी को दोनों घुटनों के बीच रखने का प्रयास करे। फिर कुछ क्षण इसी स्थिति में रुके और धीरे-धीरे वापस आ जाए।  इस आसन को 10 से 12  राउंड्स कर सकते है। यह आसान गैस की समस्या से मुक्ति दिलाने में बहुत ही सहायक होता है।

2. वज्रासन योग :-

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वज्रासन

वज्रासन योगा भी गैस और कब्ज के लिय अतिआवश्यक है। साथ ही यह करने में भी बहुत सरल है जिससे कोई भी आसानी से इस आसान को कर सकता है। वज्रासन शब्द का अर्थ है “व्रज अर्थात हीरा और आसन का मतलब होता है बैठना”।  इस आसन से हम अपने शरीर को बैलेंस में भी ला सकते है। वैसे तो सारे योगासन खाली पेट या बिना खाए ही किया जाता है लेकिन इस आसन की विशेषता है की इसे खानेके तुरंत बाद ही करना ज्यादा प्रभावी होता है। दोपहर के भोजन और रात के भोजन के पश्चात् अगर नियमित रूप से किया जाए तो पाचन तंत्र से जुड़ी हुई समस्या से निजात पायी जा सकती है। यह आसान 5-10 से मिनट तक रोजाना करना चाहिए। अगर आपके घुटनों में परेशानी हो या निचली मांसपेशियों से जुड़ी कोई परेशानी हो तो इस आसान को करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरुर करें।

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वज्रासन करने का तरीका :

वज्रासन करने के लिए भोजन के पश्चात दोनों घुटनों को मोड़कर पंजों के ऊपर बैठ जाए और बैठे हुए सांस लेते रहे। जब बैठ जाए तो अपने सांसो को धीरे-धीरे छोड़ते जाएँ| इस आसान के प्रभाव से पेट और आंत की पाचन शक्ति तीव्र हो जाती है जिससे कमजोर पाचन शक्ति के व्यक्ति का भी भोजन आसानी से पच जाता है।

3. भुजंगासन: –

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भुजंगासन

भुजंगासन को संस्कृत में सर्पासन भी कहते हैं।इस आसान में हमारा शरीर ऐसा दीखता है जैसे सर्प अपनी फन को उठाये हुए होते है। इस आसान को अंग्रेजी में “कोबरा पोज” भी कहते है| इस आसान के बहुत से फायदे होते हैं। यह गैस और कब्ज के लिए भी अति फायदेमंद होता है। इस आसन से पाचनतंत्र अच्छा हो जाता है और मलत्याग में भी सहायक होता है, जिससे कब्ज नही रह्ता है। इस आसन के प्रभाव से बवाशीर में भी बहुत लाभ होता है क्योंकि इस आसान को करने से पित्राशय की क्रियाशीलता बढती है और पाचन प्रणाली की कोमल पेशियाँ मजबूत बनती है। जिससे पेट की चर्बी घटाने में भी मदद मिलती है।

भुजंगासन करने का तरीका :-

सबसे पहले पेट के बल लेट जाएँ और दोनों हथेलियों को सीने के बगल में जमीन पर रखें। फिर दोनों पैरों को मिलकर रखें। श्वास लेते हुए धीरे-धीरे अपने सिर को ऊपर उठाये और कुछ क्षण इसी स्थिति में रहें, फिर पूर्वावस्था में आ जाए। इसे 30-30 सेकेण्ड करके 3-5 राउंड कर सकते है। अब अपनी क्षमतानुसार या प्रैक्टिस के अनुसार जितना हो सके अपने सिर को ऊपर तक उठा सकते है और जितना हो सके पीछे की ओर ले जा सकते है। ध्यान रखें कि नाभि के निचे वाला भाग भूमि पर ही टिका कर रखें।

नोट: – जब तक पूरी तरह से प्रैक्टिस न हो जाए तब तक ज्यादा जोर न लगायें ना ही ज्यादा जबरदस्ती करें, नहीं तो आपकी परेशानियाँ कम होने के बजाए ज्यादा बढ़ जाएंगी। 

4. सर्वांगासन : –

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सर्वांगासन

 

जैस की आपको नाम से ही पता चल गया होगा की ऐसा आसन जो शरीर के सारे अंगों के लिए हो। सर्वांगासन अर्थात सर्वागन मतलब सारा अंग और आसान मतलब योग या बैठक। इस आसन या योग से सभी अंगों का व्यायाम हो जाता है और सारे अंगो को फायदा मिलता है। इस आसान के प्रभाव से पाचन क्रिया मजबूत होती है और कब्ज में राहत मिलती है।

सर्वांगासन  करने का तरीका : –

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएँ और दोनों पैरों को मिलकर रखें, फिर दोनों हथेलियों को जमीन की ओर रखें। अब सांस भरकर दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाये। पैरों को उठाते समय हाथ की सहायता ले सकते हैं। पैरों को 90 डिग्री या 120 डिग्री पर ले जाकर हाथों को उठाकर कमर के पीछे लगायें, फिर कोहनी को उठने ना दें, पैरों को मिलकर सीधा करें। थोड़ी देर तक ऐसे ही अपने आप को रोक कर रखें और फिर धीरे-धीरे अपने पूर्वावस्था में  वापस आ जाएं। अब आँखों को बंद कर ध्यान भौहों के बीच तीसरे नेत्र पर सहजता  से रखें। इसे चाहे तो आप 1 मिनट से शुरू करके 3-5 मिनट तक कर सकते है

नोट:- इसे हाई ब्लडप्रेशर एवं माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति और गर्भवती महिलाएं ना करें। बिना डॉक्टर के परामर्श के इस योगसान का अभ्यास ना करें।

5.  नौकासन : –

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नौकासन

नौकासन जैसा नाम से ही पता चलता है कि “नौका का मतलब नाव और आसान मतलब योग या बैठक। इस योगासन से पाचन तंत्र मजबूत होता है। छोटी एवं बड़ी आँत में लाभ मिलता है। अंगूठे से अँगुलियों तक खिंचाव होने के कारण शुद्ध रक्त तीव्र गति से प्रभावित होता है, जिससे हमारा शरीर निरोगी बना रहता है। इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे  शरीर की आकृति नौका यानि नाव के समान दिखायी देती है। इसी कारण से इसे नौकासन कहते है।

नौकासन करने का तरीका : –

सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं, फिर अपने दोनों हाथों को जोड़े और हथेलियों को ऐसे रखें जैसे कि दंडवत प्रणाम करते है। फिर इसी मुद्रा में दोनों हथेलियों और पैरों को एक साथ जोड़े हुए उपर की ओर उठाना है। जब तक प्रैक्टिस न हो तब तक ज्यादा देर अभ्यास ना करें, नही तो मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है। इसे 30 सेकेण्ड के 3-5 राउंड तक सकते है। इस आसन से पेट की चर्बी हटाने में भी मदद मिलती है।

नोट : – स्लिप डिस्क से ग्रसित व्यक्ति और गर्भवती महिलाएं इस आसन को ना करें। 

6. बालासन : –

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बालासन

बालासन का मतलब है “बाल अर्थात बालक या बचपन” और आसन का मतलब होता है योग या बैठक यानि बच्चों की तरह बैठने वाला आसन बालासन कहलाता है। बालासन में हम अपने हाथों और शरीर को पूरी तरह से आगे झुकाते है वो भी घुटनों के बल बैठ कर। इस आसन के प्रयोग से पाचन तंत्र मजबूत होता है और गैस से राहत मिलती है। इस आसन के करने से पेट के अंदर जितने भी तंत्र होते है वो सभी स्ट्रेच होने के साथ-साथ मजबूत भी होते है। इस आसन को करने से जांघो, टखनों और कूल्हों की भी कसरत हो जाती है। यह आसन हमारे शारीरिक एवं मानसिक थकान को भी दूर करता है।

बालासन करने का तरीका : –

सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं। फिर धीरे-धीरे आगे की ओर झुके और सर को जमीं से स्पर्श करें। अब हाथों को पीछे की तरफ ले जाएं और धीरे-धीरे शरीर को ढीला छोड़ दे। इसके 1 से 3 मिनट तक 2-2 सेट कर सकते है।

नोट : – गर्भवती स्त्रियों और कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को ना करें। 

7. धनुरासन आसन : –

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धनुरासन योगा 

धनुरासन पेट एवं शरीर के दर्द में लाभदायक हैं। धनुरासन का मतलब होता है “धनु अर्थात धनुष और आसन अर्थात बैठना। इस आसन में शरीर की आकृति धनुष के आकर की हो जाती है। इस आसन को पेट के बल लेट कर किया जाता है। अर्थात यह आसन मुख्य रूप से पेट और पाचनतंत्र से जुड़ा है। इस आसन के 3-5 राउंड 30 -30 सेकण्ड तक कर सकते हैं।

धनुरासन करने का तरीका : –

सबसे पहले पेट के बल लेट जाएँ और अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें। अब दोनों हाथों से दोनों पैरों को टखने के पास से पकड़े और धीरे-धीरे अपने शरीर को ऊपर की तरफ खींचे। अपने हाथों को ऐसे रखें की वो पूरी तरह खींचे हुए हो। शरीर को ऐसे उठाये कि वो नाभि के ऊपर केन्द्रित हो जाएं। इस प्रक्रिया में सांसो का आवा-गमन भी महत्वपूर्ण हैं। यह आसन गैस, कब्ज और पेट से जुड़ी परेशानियों के लिए लाभदायक हैं। 

नोट : – गर्भवती स्त्रियों इस आसन को बिलकुल भी ना करें।

8. पश्चिमोत्रासन : –

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पश्चिमोत्तानासन 

पश्चिमोत्तानासन शब्द का अर्थ होता है, पश्चिम अर्थात पीछे या पश्चिम दिशा, तीव्र खिंचाव और आसन का मतलब होता है योग या बैठना। इसका मतलब है कि इस योगासन में शरीर के बीच या पीछे के हिस्से को तीव्र खिंचाव प्रदान करना, जिससे शरीर की ऊर्जा नियंत्रित या इक्कठी हो सके। पश्चिमोत्रासन कमर के निचले हिस्से के लिए रामबाण का काम करता है। इसके अभ्यास से कमर के निचले हिस्से के दर्द में छुटकारा पाना संभव है। इसके अभ्यास से पेट संबंधी सभी प्रकार के रोग दूर होते है।  यह पाचनतंत्र को मजबूत बनाकर गैस से राहत दिलाता है। इसके साथ ही मोटापा काम करने में भी सहायक की भूमिका निभाता है।

पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका : –

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आराम से दोनों पैरों को मिलाकर और खोलकर बैठ जाएं। अब दोनों हाथों को घुटने पर रखें। श्वांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाये और श्वांस छोड़ते हुए दोनों हाथों से दोनों पैरों को पकड़े। फिर श्वांस लेते हुए हाथों को ऊपर से पीछे जाते हुए लेट जाएं। पुनः हाथों को ऊपर उठा लें।  दोनों हाथों से दोनों पैरों को पकड़ते हुए पुनः दोनों हाथों को ऊपर से पीछे ले जाते हुए लेट जाएं। इस प्रक्रिया को जितना हो सके तेजी से करें लेकिन श्वांस की गति सामान्य ही रखें। इससे 3 से लेकर 11 राउंड तक कर सकते है।  

9. अनुलोम-विलोम प्राणायाम : –

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अनुलोम-विलोम

अनुलोम-विलोम प्राणायाम से प्राणवायु संतुलित (Balance) होती है। सिरदर्द, माइग्रेन, जोड़ों और शरीर के दर्द में भी यह बहुत लाभकारी होता है।  यह बाई और दाई ओर के मस्तिष्क की  शुद्धि करता है। इसके प्रभाव से गैस और कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है।

अनुलोम-विलोम करने का तरीका : –

इसके लिए सबसे पहले दोनों पैरों को मोड़कर सुखासन में बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और अनामिका तथा कनिष्ठा (छोटी अंगुली) से बाई नासिका को बंद कर लें। दाहिनी नासिका से श्वांस लें। अब अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें और बाई नासिका से श्वांस निकाल दें। कुछ क्षण तक ऐसे ही रुके और फिर दाई नासिका से श्वांस निकाल दें। कुछ क्षण फिर रुके। पुनः दाई नासिका से श्वांस लें और इसी तरह से बिना आवाज किए धीरे-धीरे श्वांस भीतर खींचते और छोड़ते रहे। इसे आप प्रतिदिन 10 मिनट तक कर सकते है।

10. कपालभाति : –

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कपालभाति

कपालभाति के नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां और भी मजबूत होती है कपालभाति यह मोटापे को दूर करने के लिए अत्यंत असरदार प्राणायाम है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर की अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे काम होने लगती है।

कपालभाति करने का तरीका : –

सबसे पहले सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं और दोनों हाथों को घुटनों पर रखे। अपनी आँखों को बंद कर लें और शुरू करें। शुरू-शुरू में धीरे-धीरे फिर कुछ समय के बाद तेजी से करने का प्रयास करें। सुखासन में बैठकर दोनों नासिका छिद्रों से सांस अन्दर की ओर भरते जाएँ, फिर उन्हें थोड़ी देर तक रोक कर रखें, जितने देर तक आप सहज रूप से कर सकते है। फिर नाक से ही सांसों को छोड़ते जाएँ। इस प्रक्रिया के दौरान नाभि पर हल्का-हल्का दबाब या धक्का महसूस होगा तभी ये सही होगा। शुरू-शुरू में इस प्रक्रिया को एक बार में 30 से 40 स्ट्रोक कर सकते है, फिर धीरे-धीरे इसे बढाकर 100 या इससे अधिक स्ट्रोक भी कर सकते है। इसे 3 से 10 मिनट तक अपनी क्षमता के अनुसार करें।

नोट : – जिन्हें माइग्रेन, हाई ब्लडप्रेशर हो वो इसे धीरे-धीरे करें, लेकिन गर्भवती महिलाएं बिलकुल भी ना करें।

गैस में खानपान : –

गैस की समस्या अगर हो तो दैनिक जीवन में खानपान का अत्यधिक ध्यान रखना चाहिए। गैस के मरीजो को जितना हो सके कम से कम तेल-मसालेयुक्त भोजन का सेवन करना चाहिए, साथ ही तरल और हल्के सुपाच्य भोजन का सेवन करना चाहिए। फाइबर युक्त भोजन का सेवन अपने दैनिक जीवनचर्या में शामिल जरुर करे। ज्यादा देर तक भूखा या खाली पेट भी नही रहना चाहिए| फलो और हरी पत्तेदार साग–सब्जियों का सेवन अत्यधिक करना चाहिए। दूध की अपेक्षा दही का सेवन अत्यधिक फायदेमंद होता है।

नोट: – “गरम दूध या गरम भोजन का सेवन गैस के मरीजो के लिए वर्जित है।”

तो दोस्तों कैसी लगी आप सबको मेरे द्वारा दी गई जाकारी। अगर अच्छी लगे तो प्लीज़ अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें और ऐसी ही जानकारी के लिए मुझे फॉलो जरुर करें।

आइये इस योगा डे पर हम सब यह प्रण करें की थोड़ी बहुत ही सही लेकिन नियमित रूप से योगा जरुर करेंगे और अपने आप को स्वस्थ रखेंगे।        

 

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